ओजस्वी वाणी की नन्ही स्वर-सरिता और बाल वाचिका है आन्या ठाकुर
विशेष साक्षात्कार
ओजस्वी वाणी की नन्ही स्वर-सरिता और बाल वाचिका है आन्या ठाकुर
प्रस्तुति : उलझन सुलझन
प्रश्न १. आन्या, सबसे पहले अपने बारे में हमारे पाठकों को बताइए।
आन्या : "मेरा नाम आन्या ठाकुर है। मेरी उम्र 7 वर्ष है। मुझे पढ़ाई करना, चित्र बनाना, खेलना और सबसे अधिक कविताएँ सुनना तथा सुनाना बहुत अच्छा लगता है। जब भी मंच पर कविता सुनाती हूँ तो बहुत खुशी होती है।"
प्रश्न २. इतनी छोटी उम्र में कविता पाठ की प्रेरणा आपको कहाँ से मिली?
आन्या : "मेरे मम्मी-पापा और दीदी हमेशा अच्छी कविताएँ सुनाते थे। उन्हें सुनते-सुनते मुझे भी कविताएँ याद होने लगीं। फिर मैंने उन्हें पूरे भाव और जोश के साथ बोलना शुरू किया। घर से ही मुझे सबसे बड़ी प्रेरणा मिली।"
प्रश्न ३. आपको वीर रस की कविताएँ ही सबसे अधिक क्यों पसंद हैं?
आन्या : "वीर रस की कविताएँ सुनकर मन में देशभक्ति आती है। मुझे अपने सैनिकों, भारत माता और हमारे वीरों की बातें सुनना बहुत अच्छा लगता है। ऐसी कविताएँ मुझे साहसी बनने की प्रेरणा देती हैं।"
प्रश्न ४. आपने अनेक महान कवियों की रचनाएँ कंठस्थ की हैं। यह कैसे संभव हो पाया?
आन्या : "मैं रोज़ थोड़ा-थोड़ा अभ्यास करती हूँ। एक कविता को कई बार सुनती हूँ, फिर उसे दोहराती हूँ। जब अर्थ समझ में आता है तो उसे याद रखना आसान हो जाता है।"
प्रश्न ५. शिव तांडव स्तोत्र जैसे कठिन श्लोक भी आपने याद कर लिए। इसमें सबसे बड़ी चुनौती क्या रही?
आन्या :"शुरू में शब्द कठिन लगते थे, लेकिन मम्मी-पापा ने धीरे-धीरे सिखाया। रोज़ अभ्यास किया, इसलिए अब उन्हें बोलना अच्छा लगता है।"
प्रश्न ६. मंच पर जाते समय आपको घबराहट होती है?
आन्या : "शुरू में थोड़ी होती थी, लेकिन जैसे ही कविता शुरू करती हूँ, सारी घबराहट खत्म हो जाती है। फिर मुझे लगता है कि मैं अपने परिवार के सामने ही कविता सुना रही हूँ।"
प्रश्न ७. आपने किन-किन कवियों की रचनाओं का पाठ किया है?
आन्या : "मुझे श्री रामधारी सिंह दिनकर जी की *कृष्ण की चेतावनी* बहुत पसंद है। इसके अलावा दुष्यन्त कुमार जी, शिवमंगल सिंह सुमन जी, मैथिलीशरण गुप्त जी, हरिवंश राय बच्चन जी, अटल बिहारी वाजपेयी जी, मुकुट बिहारी सरोज जी, सतीश सृजन जी, श्याम सुंदर रावत जी, शुभम श्याम जी, रुद्र प्रताप रुद्र जी, श्रद्धा शौर्या जी सहित अनेक कवियों की कविताएँ सुनाना अच्छा लगता है।"
प्रश्न ८. पढ़ाई, कला, खेल और कविता—इन सबमें संतुलन कैसे बना लेती हैं?
आन्या : "मैं पहले पढ़ाई करती हूँ। उसके बाद समय मिलने पर कविता का अभ्यास करती हूँ। मुझे ड्राइंग बनाना और खेलना भी बहुत अच्छा लगता है।"
प्रश्न ९. आपकी सबसे यादगार मंचीय प्रस्तुति कौन-सी रही?
आन्या : "कारगिल विजय दिवस के कार्यक्रम में कविता सुनाना मेरे लिए बहुत खास था। वहाँ मुझे सम्माननीय अनुसुइया उइके जी से सम्मान और आशीर्वाद मिला। वह दिन मैं कभी नहीं भूलूँगी।"
प्रश्न १०. जब लोग आपकी प्रस्तुति की प्रशंसा करते हैं तो कैसा लगता है?
आन्या : "बहुत अच्छा लगता है। तब और भी मन करता है कि मैं अच्छी कविताएँ सीखूँ और सबको सुनाऊँ।"
प्रश्न ११. आपकी सफलता में परिवार की क्या भूमिका रही है?
आन्या : "मेरे मम्मी-पापा और दीदी हमेशा मेरा साथ देते हैं। वे मुझे नई-नई कविताएँ सिखाते हैं, अभ्यास कराते हैं और मेरा हौसला बढ़ाते हैं।"
प्रश्न १२. आपको कौन-सी कविता सबसे अधिक प्रिय है और क्यों?
आन्या : "मुझे कृष्ण की चेतावनी बहुत पसंद है, क्योंकि उसमें साहस, नीति और देश के लिए प्रेरणा मिलती है।"
प्रश्न 13. आगे चलकर आप क्या बनना चाहती हैं?
आन्या : "मैं पढ़-लिखकर एक अच्छी इंसान और किसी प्रशासनिक सेवा में जाना चाहती हूँ। साथ ही मंचों पर कविता सुनाकर लोगों को प्रेरित करना चाहती हूँ।"
प्रश्न १४. आपके जैसे बच्चों के लिए आप क्या संदेश देना चाहेंगी?
आन्या : "रोज़ पढ़ाई करें, माता-पिता और गुरुजनों की बात मानें, अच्छे संस्कार सीखें और भारत से प्यार करें। अगर मन लगाकर अभ्यास करेंगे तो हर काम अच्छा होगा।"
प्रश्न १५. अंत में 'उलझन सुलझन' के पाठकों के लिए आपका संदेश।
आन्या : "सभी लोग अच्छी पुस्तकें पढ़ें, हिंदी भाषा से प्रेम करें, अपने देश का सम्मान करें और हमेशा सच बोलें। हम सब मिलकर भारत को और भी महान बना सकते हैं।"
उलझन सुलझन का भाव
आन्या ठाकुर केवल सात वर्ष की आयु में यह सिद्ध कर रही हैं कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती। ओजस्वी वाणी, विलक्षण स्मरण-शक्ति, साहित्य के प्रति अनुराग, भारतीय संस्कृति के प्रति गहरा सम्मान और परिवार से मिले उत्कृष्ट संस्कार—इन सभी का सुंदर संगम उनके व्यक्तित्व में दिखाई देता है। वे केवल कविताओं का पाठ नहीं करतीं, बल्कि प्रत्येक शब्द को भाव, ऊर्जा और आत्मविश्वास के साथ जीवंत कर देती हैं। निस्संदेह, यह नन्ही बाल कवियत्री आने वाले समय में हिंदी साहित्य और राष्ट्रप्रेम की एक सशक्त स्वरवाहिनी बनकर अनेक बच्चों के लिए प्रेरणा का स्रोत सिद्ध होगी।
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