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नन्हे हाथों की सृजनशीलता से नवाचार की नई राह

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रंगोली जब चित्र बन जाए, तो बाल प्रतिभा को पहचानें संदर्भ नन्हे हाथों की सृजनशीलता से नवाचार की नई राह कभी-कभी किसी नन्हे बालक या बालिका के हाथों से बनी रचना केवल एक कलाकृति नहीं रहती, बल्कि वह उसकी कल्पनाशक्ति, धैर्य, सौंदर्यबोध और भीतर छिपी सृजनात्मक क्षमता का परिचय बन जाती है। विजया डालमिया जी की नौ वर्षीय दोहती द्वारा बनाई गई यह रंगोली भी कुछ ऐसा ही अनुभव कराती है। देखने में पेंटिंग जैसी प्रतीत होने वाली इस रंगोली में रंगों का संयोजन, रचनात्मक दृष्टि और सूक्ष्म कार्य के प्रति एकाग्रता विस्मय उत्पन्न करती है। यह रचना हमें केवल उसकी सुंदरता देखने के लिए नहीं रोकती, बल्कि एक महत्वपूर्ण प्रश्न भी सामने रखती है—क्या हम अपने बच्चों की प्रतिभा को केवल देखकर प्रशंसा करते हैं, या उसे आगे बढ़ने के अवसर भी प्रदान करते हैं? आलेख  नन्हे हाथों में नवाचार का संसार बच्चों की प्रतिभा अक्सर किसी पूर्व निर्धारित पाठ्यक्रम या प्रतियोगिता की सीमा में जन्म नहीं लेती। वह कभी रंगों के माध्यम से प्रकट होती है, कभी मिट्टी को आकार देते हुए, कभी किसी नई वस्तु का निर्माण करते हुए और कभी किसी सामान्य गतिविधि...

ओजस्वी वाणी की नन्ही स्वर-सरिता और बाल वाचिका है आन्या ठाकुर

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  विशेष साक्षात्कार ओजस्वी वाणी की नन्ही स्वर-सरिता और बाल वाचिका है आन्या ठाकुर  प्रस्तुति : उलझन सुलझन प्रश्न १. आन्या, सबसे पहले अपने बारे में हमारे पाठकों को बताइए। आन्या : "मेरा नाम आन्या ठाकुर है। मेरी उम्र 7 वर्ष है। मुझे पढ़ाई करना, चित्र बनाना, खेलना और सबसे अधिक कविताएँ सुनना तथा सुनाना बहुत अच्छा लगता है। जब भी मंच पर कविता सुनाती हूँ तो बहुत खुशी होती है।" प्रश्न २. इतनी छोटी उम्र में कविता पाठ की प्रेरणा आपको कहाँ से मिली? आन्या : "मेरे मम्मी-पापा और दीदी हमेशा अच्छी कविताएँ सुनाते थे। उन्हें सुनते-सुनते मुझे भी कविताएँ याद होने लगीं। फिर मैंने उन्हें पूरे भाव और जोश के साथ बोलना शुरू किया। घर से ही मुझे सबसे बड़ी प्रेरणा मिली।" प्रश्न ३. आपको वीर रस की कविताएँ ही सबसे अधिक क्यों पसंद हैं? आन्या : "वीर रस की कविताएँ सुनकर मन में देशभक्ति आती है। मुझे अपने सैनिकों, भारत माता और हमारे वीरों की बातें सुनना बहुत अच्छा लगता है। ऐसी कविताएँ मुझे साहसी बनने की प्रेरणा देती हैं।" प्रश्न ४. आपने अनेक महान कवियों की रचनाएँ कंठस्थ की हैं। यह कैसे संभव हो...

बालमन की अनकही दुनिया को समझने वाली काउंसलर शिखा अग्रवाल से बातचीत

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बालमन को समझने वाली काउंसलर शिखा जी से बातचीत यह केवल एक साक्षात्कार भर नहीं, अपितु एक संवेदनशील शिक्षिका, काउंसलर और बाल-मनोविज्ञान की गहरी समझ रखने वाली व्यक्तित्व के विचारों का ऐसा संवाद है, जो समाज, अभिभावकों और शिक्षकों—तीनों को दिशा देता है। विशेष साक्षात्कार जब बड़े शब्द बोलते हैं, बच्चे भावनाएँ सुनते हैं।  प्रश्न १. आपकी कहानी "कक्षा की अनकही कहानी" ने अनगिनत लोगों को भावुक किया। इस घटना ने आपको सबसे बड़ा जीवन-पाठ क्या सिखाया? शिखा अग्रवाल : "इस घटना ने मुझे सिखाया कि किसी भी बच्चे का व्यवहार उसकी पूरी पहचान नहीं होता। कई बार उसका व्यवहार केवल उसके भीतर चल रहे भावनात्मक संघर्ष का एक संकेत होता है। यदि हम केवल प्रतिक्रिया देखें, तो बच्चे को खो देंगे; यदि उसके पीछे की भावना समझ लें, तो उसका विश्वास जीत सकते हैं।" प्रश्न २. आपने उस छात्र को डाँटने के बजाय धैर्य चुना। आज के शिक्षकों के लिए यह कितना आवश्यक है? उत्तर : "शिक्षक का पहला दायित्व पढ़ाना नहीं, समझना है। अनुशासन आवश्यक है, लेकिन संवेदनशीलता उससे भी अधिक आवश्यक है। जब बच्चा सुरक्षित महसूस करता है,...

नन्ही आँखों का आसमान है गुन्नू

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नन्ही आँखों का आसमान है  गुन्नू कुछ आँखें केवल दुनिया को नहीं देखतीं, वे अपने भीतर एक पूरा आसमान समेटे होती हैं। गुन्नू की ये नन्ही-नन्ही, बड़ी-बड़ी आँखें भी ऐसी ही हैं—जिनमें जिज्ञासा है, मासूमियत है, सपनों की चमक है और जीवन के हर रंग को पहली बार महसूस करने का उत्साह है। कभी गुलाबी फ्रॉक में हरी-भरी घास पर खिलखिलाकर दौड़ती हुई, तो कभी धूप की तीखी किरणों से आँखें मूँदकर मुस्कुराती हुई गुन्नू मानो प्रकृति से ही बातें करती दिखाई देती है। उसके घुँघराले बाल हवा के संग खेलते हैं और उसके चेहरे की हर मुस्कान आसपास के वातावरण को जीवंत बना देती है। एक तस्वीर में वह मासूम निगाहों से कैमरे की ओर देखती है। उन आँखों में प्रश्न भी हैं, विश्वास भी और अपनेपन की अनकही भाषा भी। ऐसा लगता है जैसे वह हर चेहरे में एक नई कहानी ढूँढ़ रही हो। उसकी भोली दृष्टि हमें याद दिलाती है कि संसार को सबसे सुंदर रूप में देखने की कला बच्चों के पास ही होती है। जब वह अपनी दादी की गोद में बैठकर दूर कहीं इशारा करती है, तब उसकी उत्सुकता साफ झलकती है। उसकी छोटी-सी उँगली मानो कह रही हो—"देखो, दुनिया कितनी बड़ी है, और मुझे इस...