नन्हे हाथों की सृजनशीलता से नवाचार की नई राह
रंगोली जब चित्र बन जाए, तो बाल प्रतिभा को पहचानें संदर्भ नन्हे हाथों की सृजनशीलता से नवाचार की नई राह कभी-कभी किसी नन्हे बालक या बालिका के हाथों से बनी रचना केवल एक कलाकृति नहीं रहती, बल्कि वह उसकी कल्पनाशक्ति, धैर्य, सौंदर्यबोध और भीतर छिपी सृजनात्मक क्षमता का परिचय बन जाती है। विजया डालमिया जी की नौ वर्षीय दोहती द्वारा बनाई गई यह रंगोली भी कुछ ऐसा ही अनुभव कराती है। देखने में पेंटिंग जैसी प्रतीत होने वाली इस रंगोली में रंगों का संयोजन, रचनात्मक दृष्टि और सूक्ष्म कार्य के प्रति एकाग्रता विस्मय उत्पन्न करती है। यह रचना हमें केवल उसकी सुंदरता देखने के लिए नहीं रोकती, बल्कि एक महत्वपूर्ण प्रश्न भी सामने रखती है—क्या हम अपने बच्चों की प्रतिभा को केवल देखकर प्रशंसा करते हैं, या उसे आगे बढ़ने के अवसर भी प्रदान करते हैं? आलेख नन्हे हाथों में नवाचार का संसार बच्चों की प्रतिभा अक्सर किसी पूर्व निर्धारित पाठ्यक्रम या प्रतियोगिता की सीमा में जन्म नहीं लेती। वह कभी रंगों के माध्यम से प्रकट होती है, कभी मिट्टी को आकार देते हुए, कभी किसी नई वस्तु का निर्माण करते हुए और कभी किसी सामान्य गतिविधि...