नन्ही आँखों का आसमान है गुन्नू

नन्ही आँखों का आसमान है गुन्नू

कुछ आँखें केवल दुनिया को नहीं देखतीं, वे अपने भीतर एक पूरा आसमान समेटे होती हैं। गुन्नू की ये नन्ही-नन्ही, बड़ी-बड़ी आँखें भी ऐसी ही हैं—जिनमें जिज्ञासा है, मासूमियत है, सपनों की चमक है और जीवन के हर रंग को पहली बार महसूस करने का उत्साह है।

कभी गुलाबी फ्रॉक में हरी-भरी घास पर खिलखिलाकर दौड़ती हुई, तो कभी धूप की तीखी किरणों से आँखें मूँदकर मुस्कुराती हुई गुन्नू मानो प्रकृति से ही बातें करती दिखाई देती है। उसके घुँघराले बाल हवा के संग खेलते हैं और उसके चेहरे की हर मुस्कान आसपास के वातावरण को जीवंत बना देती है।

एक तस्वीर में वह मासूम निगाहों से कैमरे की ओर देखती है। उन आँखों में प्रश्न भी हैं, विश्वास भी और अपनेपन की अनकही भाषा भी। ऐसा लगता है जैसे वह हर चेहरे में एक नई कहानी ढूँढ़ रही हो। उसकी भोली दृष्टि हमें याद दिलाती है कि संसार को सबसे सुंदर रूप में देखने की कला बच्चों के पास ही होती है।

जब वह अपनी दादी की गोद में बैठकर दूर कहीं इशारा करती है, तब उसकी उत्सुकता साफ झलकती है। उसकी छोटी-सी उँगली मानो कह रही हो—"देखो, दुनिया कितनी बड़ी है, और मुझे इसे अभी बहुत करीब से देखना है।" वहीं दादी की मुस्कान उस स्नेहिल छाँव का प्रतीक बन जाती है, जिसमें हर बचपन सुरक्षित और निश्चिंत होकर खिलता है।

सबसे मनमोहक दृश्य वह है, जब गुन्नू का चेहरा बिल्कुल पास से दिखाई देता है। उसकी गहरी, चमकदार आँखें किसी निर्मल झील की तरह शांत हैं। उनमें छल नहीं, केवल सरलता है; भय नहीं, केवल भरोसा है। वे आँखें मानो भविष्य से कह रही हों—"मैं आ रही हूँ, अपने सपनों के रंग लेकर।"

गुन्नू अभी शब्दों से बहुत कुछ नहीं कह पाती, लेकिन उसकी मुस्कान, उसकी आँखें, उसकी चंचल हरकतें और उसका निष्कपट चेहरा जीवन का सबसे सुंदर संदेश देते हैं—खुशियाँ बड़ी नहीं होतीं, उन्हें देखने वाली नज़र बड़ी होती है।

नन्ही आँखों का यह आसमान केवल गुन्नू का नहीं, हर उस बच्चे का है जिसके सपनों को प्रेम, संस्कार और अवसर मिलें। क्योंकि आज की इन मासूम आँखों में ही कल का उज्ज्वल भारत बसता है।

"इन नन्ही आँखों में छिपे हैं अनगिनत सपनों के तारे,
मासूम मुस्कानों से रोशन होंगे कल के सारे नज़ारे।"

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