बाल कविता

 

बाल कविता आजा कब्बू, आजा कब्बू  बाबू तुझको पुकारे कब्बू उड़ते पक्षी उड़ती चिड़िया  बाबू सबको पुकारे कब्बू  मम्मी बोले, पापा बोले  आया कब्बू, आया कब्बू  बाबू की किलकारी गूंजे  हाथ हिलाकर बोले कब्बू  बाबू की दुनिया अलबेली  फुर्र-फुर उड़ता जिसमें कब्बू  बाबू को कब्बू है प्यारा तुतलाकर बोले कब्बू, कब्बू विजया डालमिया संपादक (मेरी निहारिका) और राष्ट्रीय संयोजिका, उलझन सुलझन (लेडीज लेखिका विंग)

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