प्रकृति (द्वितीय अभ्यास सत्र)


रमन वन मन हर सकत। मंद पवन व कल कल जल मन हर सकत। नभ स्वच्छ नभ। मन वन संग रम। कण कण मध रस भर। तन मन तृप्त बन। वन धन अमर धन रमन समझ।

कल्पना



 




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